Tuesday, 12 May 2015

फूल खिले खुशियों के खेली बहार इस आँगन में

अपनी शादी की सालगिरह पर प्रस्तुत :::::
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फूल खिले खुशियों के खेली बहार इस आँगन में
धरा जबसे पाँव प्रिय तुमने जीवन के कानन में ॥

धन्यता हमारी थी जो तुमने हमे स्वीकार किया
मेरे गुण दोषों के संग मुझको अंगीकार किया
दुर्लंघ्य पर्वत विपदा के आए जीवन राह में
यह सम्बल तुम्हारा था हंसकर हमने पार किया
रंग बिरंगी  खिली रौशनी वन प्रांतर निर्जन में ॥

फूल खिले खुशियों के खेली बहार इस आँगन में
धरा जबसे पाँव प्रिय तुमने जीवन के कानन में ॥

पूंज ज्योति की तुम बनी जब तम ने जीवन को घेरा
हाथ पकड़  बाहर लायी जब दुखों ने मुझको हेरा
मात पिता निज गृह को तज मम गृह को आधार किया
बाँहें तुम्हारी सर्वदा प्रिय रही सुखों का डेरा
मास बारह वर्ष के भींगा प्रीत के सावन में ॥

फूल खिले खुशियों के खेली बहार इस आँगन में
धरा जबसे पाँव प्रिय तुमने जीवन के कानन में॥
.............. नीरज कुमार नीर ..........
#neeraj_kumar_neer

11 comments:

  1. सराहनीय पंक्तियाँ |

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  2. बहुत सुन्दर कोमल पंक्तियाँ ....

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  3. बहुत ही सुंदर और शानदार रचना। बधाई।

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  4. शानदार पंक्तियाँ कविवर नीर साब ! और शादी की वर्षगाँठ पर हार्दिक बधाई ! दोनों को , आप और आपके जीवन साथी को अपार खुशियां मिलती रहे !

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  5. वाह नहुत ही शानदार पेशकश......यूँ ही कहते रहिएगा......दिली दाद !!!

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  6. सुंदर रचना. आपको अपने प्रिय का साथ ता-उम्र मिलाता रहे. शादी की सालगिरह पर हार्दिक बधाई. खुश रहें, स्वस्थ रहें एवं मस्त रहें.

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  7. सुन्दर प्रस्तुति

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  8. हिंदी में बहुत कम इतना अच्छा लिखा जा रहा है ।बधाई

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आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है. आपकी टिप्पणी के लिए आपका बहुत आभार.

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