Tuesday, 7 April 2015

ले गए चैन करार


मन सरिता में उठी तरंगे
देखा  बैठ  किनारे 
ले गए  चैन  करार 
प्रिय नीरज नैन तुम्हारे।  

अहसासों के अंबर में 
खग बनकर तुम उड़ती हो 
प्रेम सरोवर के तल पर 
मीन मचलती फिरती हो 
तुम पूनम की चाँद सखी री 
नभ में कई सितारे । 

तुम पाटल की पांखुरी
इस जीवन में भरो सुवास 
कभी तो  मिलने आ जाओ
बंधी   हुई  है  आस 
मन का मेरा पपीहरा 
पल पल तुम्हें पुकारे। 

स्वर्ण कलश की अमृत तुम
बूंद एक तो छलकाओ
अमर प्रेम हो जाएगा
अधरों से अगर पिलाओ
एक एक पल अब मुश्किल
जीना तेरे बिना रे।

प्रेम रस सदा एक सा
चाहे आदि मध्य या अंत 
प्रेम साचा जम जम का पानी
बहता  रहे अनंत 
प्रेम पथ का कुशल बटोही 
लक्ष्य को कहाँ निहारे। 

ले गए चैन करार 
प्रिय नीरज नैन तुम्हारे। 

मन सरिता में उठी तरंगे
देखा बैठ किनारे 
ले गए चैन करार 
प्रिय नीरज नैन तुम्हारे। 
............. नीरज कुमार नीर
#neeraj_kumar_neer

3 comments:

  1. अनुराग की कोमल भावनाओं से सिक्त सुन्दर रचना !

    ReplyDelete
  2. सुंदर आती सुंदर !!

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है. आपकी टिप्पणी के लिए आपका बहुत आभार.

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...