Thursday, 4 December 2014

माँ है मेरी वो


चलती अहर्निश
रूकती नहीं है
माँ है मेरी वो
थकती नहीं है

निष्काम  निरंतर 
लेती है मेरी हर 
  कष्ट हर
किसी से कुछ भी
कहती नहीं है

चाँद डूबने से पहले
चाँद चढ़ जाने तक
खग के  उठने से पहले
सबके सो जाने तक
रहती दौड़ती
ठहरती नहीं है 

खाना पीना  राशन वासन
कपड़े लत्ते दीये दवाई
शिक्षा दीक्षा नाते रिश्ते
पूजा पंडित सर सफाई
निभाती है सभी
ऊबती नहीं है

चलती अहर्निश
रूकती नहीं है
माँ है मेरी वो
थकती नहीं है...
.........
नीरज कुमार नीर .........
neeraj kumar neer 

चाँद का डूबना यानि सुबह होना .... 
चाँद का चढ़ना यानि देर रात हो जाना। 


13 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (05.12.2014) को "ज़रा-सी रौशनी" (चर्चा अंक-1818)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  2. आपकी लिखी रचना शनिवार 06 दिसम्बर 2014 को लिंक की जाएगी........... http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  3. माँ है वो ... वो थक गयी तो श्रृष्टि रुक जाती है ... माँ को समर्पित भाव पूर्ण रचना ...

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  4. एक सच … जो हम सभी के मन में तो है … भावों में भी उजागर होना चाहिए …

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  5. सर बहुत सटीक भाव। मां पर जितना कहा जाए कम है, पर चंद Y=भावों में काफी कुछ कह दिया आपने।

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  6. बहुत सुन्दर शब्दों से सजी भावपूर्ण कविता

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  7. बहुत सुंदर कविता...

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  8. maa thakti nahi kyunki uski mamta use thakne nhi deti,.....umdaa

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  9. सुन्दर सार्थक एवं भावपूर्ण रचना

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आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है. आपकी टिप्पणी के लिए आपका बहुत आभार.

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