Thursday, 9 October 2014

तेरी याद का बादल आँखों से बरसता है


तेरी याद का बादल आँखों से बरसता है 
वस्ले  यार को दीवाना दिल  तरसता है॥ 

हो जायेगा फ़ना जुदाई की आंच में तपकर 
मोम का एक पुतला है गरमी में पिघलता है ॥ 

इश्क  की दुनियां का कायदा ना पूछिए   
दीवाना सूरज यहाँ पच्छिम से निकलता है ॥ 

मुहब्बत में रोना बहुत होता  है  नीरज 
इश्क का दरिया  समन्दर से निकलता है  ॥ 

अंधेरे की आदत है शिकायत नहीं कुछ भी 
जुगनू की फितरत है अंधेरे मे चमकता है॥

#नीरज_कुमार_नीर 
#neeraj_kumar_neer
#gazal दीवाना #deewana #जुदाई 

16 comments:

  1. वाह अत्यंत सुन्दर गजल !

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  2. बेहतरीन ग़ज़ल अभिव्यक्ति ....

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  3. आपकी लिखी रचना शनिवार 11 अक्टूबर 2014 को लिंक की जाएगी........... http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  4. वाह !!
    बहुत सुन्दर , आभार !!

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  5. वाह…बहुत बढ़िया

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  6. क्षमा चाहती हूँ भाई नीरज जी
    पोस्टिंग में गड़बड़ हो गई थी
    अब देखिये..... लिंक हाजिर है

    सादर

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  7. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति ।मेरे पोस्ट पर आप आमंश्रित हैं।!

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  8. बहुत खूब ... इश्क में डूब कर पूरब क्या पश्चिम क्या ...

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  9. Umda rachna behad ahsaas ghol diye shabdo me aapne lajawaab !!

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  10. बेहद सुन्दर रचना है। हृदयस्पर्शी....।

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  11. वाह क्या खूब लिखा आपने ........अच्छा लगा, दिल को छू लिया!

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  12. बेहतरीन ग़ज़ल।क्या बात है! बहुत खूब।

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  13. तेरी याद का बादल आंखों से बरसता है। बहुत ही लाजवाब पंक्तियां।

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