Monday, 10 February 2014

क्या तुम्हें उपहार दूँ

वसंत का आगमन हो चुका एवं valentine's day  आने वाला है तो इस अवसर के लिए विशेष प्रस्तुति :


क्या तुम्हें उपहार दूँ,
प्रिय प्रेम के प्रतिदान का.

तुम वसंत हो, अनुगामी
जिसका पर्णपात नहीं.
सुमन सुगंध सी संगिनी, 
राग द्वेष की बात नहीं. 

शब्द अपूर्ण वर्णन को
ईश्वर के वरदान का.

क्या तुम्हें उपहार दूँ,
प्रिय प्रेम के प्रतिदान का.

विकट ताप में अम्बुद री,
प्रशांत शीतल छांव सी, 
तप्त मरू में दिख जाए, 
हरियाली इक गाँव की.

कहो कैसे बखान करूँ 
पूर्ण हुए अरमान का.

क्या तुम्हें उपहार दूँ,
प्रिय प्रेम के प्रतिदान का.


मैं पतंग तुम डोर प्रिय,
तुम बिन गगन अछूता है.
तुमसे बंधकर  जीवन 
व्योम उत्कर्ष छूता है.

तुम ही कथाकार हो, इस 
जीवन के आख्यान का. 

क्या तुम्हें उपहार दूँ,
प्रिय प्रेम के प्रतिदान का.

दिवस लगे त्यौहार सा  
हर यामिनी मधुमास सी
प्रीति तुम्हारी,   उर में  
नित नित भरती आस सी

तुल्य नहीं जग में कोई 
अनुराग  के परिमाण का  

क्या तुम्हें उपहार दूँ,
प्रिय प्रेम के प्रतिदान का.

……. नीरज कुमार नीर 
#neeraj_kumar_neer

शब्दार्थ :
प्रतिदान : किसी चीज के बदले कुछ देना 
अनुगामी : जो पीछे आता है 
पर्णपात : पतझड़ 
अम्बुद : बादल
आख्यान : कथा , कहानी 
यामिनी : रात 
परिमाण : मात्रा ,  magnitude 

चित्र गूगल से साभार 





14 comments:

  1. प्रेम दिवस कि सुन्दर अभिव्यक्ति...
    :-)

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  2. Waah...jitne sunder shabd utne hi komal ehsaas..bahut sunder rachna!! Bahut khub likha hai aapne! :)

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  3. वाह ! बहुत ही सुंदर और प्रेममय रचना ....!!

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  4. प्यारी प्रेम प्रतिध्वनियाँ

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  5. लाजबाब,प्रेममय बेहतरीन प्रस्तुति...!
    RECENT POST -: पिता

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  6. बहुत बढ़िया ......

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  7. भावो का सुन्दर समायोजन......

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  8. लाजवाब सृजन. हर पंक्तियाँ प्रेम संतृप्त.

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  9. कल 13/02/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया यशवंत जी

      Delete

  10. दिवस लगे त्यौहार सा
    हर यामिनी मधुमास सी
    संग तुम्हारा, उर में
    नित नित भरती आस सी

    तुल्य नहीं जग में कोई
    अनुराग के परिमाण का

    क्या तुम्हें उपहार दूँ,
    प्रिय प्रेम के प्रतिदान का.

    adbhut .. sundar bhaw ..shubhkamnaye

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  11. Prem bhare bhav ki abhivyakti ... Prem mein kaisa uphar jabki prem apne aap mein uphar hai ...

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  12. सच्ची अनुभूतियां किसी उपहार से बयां नहीं की जा सकती....

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आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है. आपकी टिप्पणी के लिए आपका बहुत आभार.

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