Saturday, 19 October 2013

दिल –ए नाकाम से पहले


इश्क की राह   में सोचिये अव्वल गाम से पहले 
इश्क होता है जरूर दिल –ए नाकाम से पहले .

मेरी हालत देख कर आते हैं सबकी आँख में आंसू  
मैं भी कितना खुश था गर्दिश ए अय्याम से पहले .

सुकूत ए वक्त देखकर इत्मिनान मत हो जाइए 
 होती है ऐसी ही शांति हर कोहराम से पहले.

 नक्श ए सुकूत औ जुमूद तारी है जिंदगी पर
  गर्म दोपहर तो आये रंगीन शाम से पहले.

 मुझे आदत नहीं किसी का एहसान लेने की
 काम तो मेरा देखिये कोई  इनाम से पहले.

नीरज कुमार 'नीर'
#neeraj_kumar_neer 


29 comments:

  1. आप की ये सुंदर रचना आने वाले सौमवार यानी 21/10/2013 कोकुछ पंखतियों के साथ नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित है...
    सूचनार्थ।

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  2. आभार आपका कुलदीप भाई ..

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  3. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (20-10-2013) के चर्चामंच - 1404 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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    1. शुक्रिया अरुण भाई

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन कुछ खास है हम सभी में - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. शुक्रिया ब्लॉग बुलेटिन

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  5. kya bat hai khari -khari baaten bina lag-lapet ke ....

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  6. जबरदस्त ग़ज़ल.

    मुझे आदत नहीं किसी का एहसान लेने की
    काम तो मेरा देखिये कोई इनाम से पहले.

    क्या बात कही है.

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  7. सुकूत ए वक्त देखकर इत्मिनान मत हो जाइए
    होती है ऐसी ही शांति हर कोहराम से पहले.============बहुत प्यारी ग़ज़ल ,,,बधाई

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  8. सुकूत ए वक्त देखकर इत्मिनान मत हो जाइए
    होती है ऐसी ही शांति हर कोहराम से पहले.
    वाह !! बहुत सुंदर, नीरज जी.
    नई पोस्ट : धन का देवता या रक्षक

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  9. बहुत सुंदर गजल, बधाई नीरज जी.

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  10. मुझे आदत नहीं किसी का एहसान लेने की
    काम तो मेरा देखिये कोई इनाम से पहले. ..

    बहुत उम्दा शेर है ... पूरी गज़ल कमाल की है ...

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  11. इस पोस्ट की चर्चा, मंगलवार, दिनांक :-22/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -32 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा

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  12. बहुत सुन्दर रचना

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  13. मुझे आदत नहीं किसी का एहसान लेने की
    काम तो मेरा देखिये कोई इनाम से पहले.---------

    वाह जीवन की सार्थकता को बयां करती खूबसूरत गजल
    बधाई

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  14. उम्दा गजल ...बधाई

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  15. achcha likha hia aapne, par kuch words upar se ud gaye, kripya unka arth bhi likh diya kare neeche.....

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  16. अदभुत ,सुंदर गजल |

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  17. बहुत खुबसूरत ग़ज़ल ....

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  18. वाह...बहुत सुंदर और उम्दा अभिव्यक्ति...बधाई...

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  19. madhukant.shah.
    excellent,still improve.

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  20. सुकूत ए वक्त देखकर इत्मिनान मत हो जाइए
    होती है ऐसी ही शांति हर कोहराम से पहले.

    नक्श ए सुकूत औ जुमूद तारी है जिंदगी पर
    गर्म दोपहर तो आये रंगीन शाम से पहले.
    बहुत खूब नीरज जी

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  21. कल 05/सितंबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  22. बहुत खुबसूरत

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  23. मुझे आदत नहीं किसी का एहसान लेने की
    काम तो मेरा देखिये कोई इनाम से पहले
    बहुत बढ़िया

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आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है. आपकी टिप्पणी के लिए आपका बहुत आभार.

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